वॉन्टेड
जानकारी जो न्याय तक पहुंचाती है...

ज़ुल्करनैन

$5 मिलियन तक पुरस्कार

ज़ुल्करनैन, जिसका असली नाम एरिस सुमरसोनो है, को उसके साथ युद्धरत लोग दॉउद कहते हैं। यू.एस. और इन्डोनेशियन अधिकारियों ने कहा कि अपने तथाकथित पूर्वाधिकारी रिदुआन इसामुददीन, जिसे हम्बाली भी कहते हैं, की थाइलैंड में गिरफ़्तारी के बाद ज़ुल्करनैन जेमाह इस्लामिया (JI) के लिए संचालन मुखिया बन गया। जो लोग ज़ुल्करनैन को जानते हैं, उनके द्वारा इसका वर्णन कम बोलने वाले एक छोटे व्यक्ति के रूप में किया जाता है।

ज़ुल्करनैन को साउथईस्ट एशियन आतंकवादी ग्रुप जेमाह इस्लामिया के सम्भवत: उच्चतम श्रेणी के नेता के रूप में पहचाना गया है। माना जाता है कि वह उच्च वर्ग स्क्वाड का मुखिया था जिसने जकार्ता मैरियॉट होटल में आत्मघाती बमबारी को क्रियान्वित करने में मदद की जिसमें 2003 में 12 लोगों की मृत्यु हो गई और उसने उन बमों को तैयार करने में मदद की जिनसे 2002 में बाली में 202 लोगों की जान चली गई।

ज़ुल्करनैन साउथईस्ट एशिया में अल-कायदा के मुख्य व्यक्तियों में से एक है और इन्डोनेशिया में उन कुछ लोगों में एक है जिनका अल क़ायदा आतंकी नेटवर्क के साथ सीधा संपर्क है। ज़ुल्करनैन ने एक इन्डोनेशियन युनिवर्सिटी से जीव विज्ञान में एक डिग्री अर्जित की और 1980 के दशक में वह तोड़ फोड़ में विशेषज्ञ बनने के लिए प्रशिक्षिण हेतु अफगानिस्तान जाने वाले प्रथम इन्डोनेशियन युद्धरत लोगों में से एक था। ज़ुल्करनैन अब लश्कर खोस या ‘स्पेशल फोर्स’ नाम के युद्धरत लोगों के समूह का नेता है जिसके सदस्यों को कुछ 300 इन्डोनेशियन लोगों में से भर्ती किया गया था जिन्होंने अफगानिस्तान और फिलिपीन्स में प्रशिक्षण प्राप्त किया था।

ज़ुल्करनैन JI और इस्लामी बोर्डिंग स्कूल अल-मुकमिन के संस्थापक अब्दुल्लाह सुंगकर पर आश्रित व्यक्ति था, इस बोर्डिंग स्कूल में ज़ुल्करनैन और अन्य वरिष्ठ युद्धरत लोगों ने पढ़ाई की थी। 1980 के दशक के मध्य में सुंगकर ने इन्डोनेशियन लोगों के एक छोटे समूह को मुजाहिदिन कमांडर, अब्दुल रसूल सैय्यफ के अंतर्गत एक शिविर में प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए अफगानिस्तान भेजा। 1999 में सुंगकर की मृत्यु के पहले ज़ुल्करनैन को आम तौर पर अपने परामर्शदाता के बगल में देखा जाता था जब वह सम्मेलनों की व्यवस्था करने में और अधिक पुराने उग्रवाद की कार्य सूची तैयार करने में मदद किया करता था।

माना जाता है कि ज़ुल्करनैन ने 1990 के दशक में मलुकू द्वीप में युद्ध की व्यवस्था करने में मदद की थी और युद्धरत लोगों की एक मीटिंग की व्यवस्था की थी जो भिन्न-भिन्न समय में अफगानिस्तान में प्रशिक्षण प्राप्त करते थे, जिससे कि उन्हें सेना में शामिल होने में मदद मिले।